रविवार, 21 नवंबर 2010

कुछ शेर अर्ज़ है ....

When heart beating for some one-
तुम कह दो तो हवाओं का रुख मोड़ दूँ ,गगन से चमकते सितारों को तोड़ दूँ ,
दूर वादियों में मै, बनकर क्षितीज -इस जमीं को सुहाने फलक से जोड़ दूँ,


When heart broken by some one-
हवाओं का रुख आखिर किसने मोड़ा है ?चमकते सितारों को आखिर किसने तोडा है ?
लोग कहते हैं हर जख्म भर सकता है लेकिन- टूटे दिलों को आखिर किसने जोड़ा है |

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बिन पत्तों के शाख हूँ मै|
अपने कर्मो का अपयश था , या फिर किसी की हाय लगी ,
जीवन आंधी के बियाबान में, या फिर कोई बिजुरी गिरी ,
सूखे तन का हाल देख , बस मै यंही समझ पाया -
एक कुंठित अवसाद हूँ मै -
...बिन पत्तों के शाख हूँ मै|

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बिना शाख के एक पत्ता हूँ मै |
सरगोशियों के संग , बहा जा रहा हूँ मै हर पहर,
तनहाइयों के संग, डूबा जा रहा हूँ मै इस कदर,
गम-ए-बारिश का तेज झोकों में उलझते हुए -
अश्को की नमी में , उड़ा जा रहा हूँ मै दर-बदर,
...
उनकी नजरो में एक खता हूँ मै,
बिना शाख के एक पत्ता हूँ मै |

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टूटे दिल का हाल अब कासे कहूँ, अश्को ने भी बहना छोड़ दिया.........

लफ्जों से दर्द मै पी न सका , जब उन्होंने रिश्ता तोड़ दिया ............

सोचा था संभालूँगा खुद को - गिरने से मैखाने की चौखट पर ..........

किस्मत में मधुबन की गलियां थी, तो पैमाने से खुद को जोड़ लिया ..

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