आज यूं ही मन कुछ उदास है |
नहीं जानता की कारण क्या है ,ना ही मै समझ सकता,
उदासी के इस दर्द-ए-सबब में , खुद से खुद को पृथक करता ,
अब बेरंग सी लगती हैं बातें , बेज़ार -ए - गम को खुद सहता -
पस्त होती उड़ान हौसलों की , बस बेजाँ सा मै अनुभव करता |
...कुछ घुटन सा एहसास है |
आज यूं ही मन कुछ उदास है ||
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